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दुष्कर्म मामले पर उत्तर प्रदेश के डीजीपी का ऐसा शर्मनाक बयान

कानून-व्यवस्था से कोई समझौता न करने के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के एलान के 24 घंटे के भीतर ही डीजीपी एएल बनर्जी ने दुष्कर्म और हत्याओं के सवाल पर यह कहकर फिर पुलिस की किरकिरी करा दी कि ‘ये रूटीन घटनाएं हैं’। देश की सबसे बड़ी पुलिस का आला अफसर अगर जघन्य और निंदनीय घटनाओं पर इतना सतही बयान दे तो जाहिर है कि अपराधियों का मनोबल तोड़ा नहीं जा सकता।

पुलिस हनक और इकबाल से चलती है। पुलिस की वर्दी अपराधियों का मनोबल तोड़ती है और उसका एक डंडा ही अपराधियों के हथियारों पर भारी पड़ता है। अगर सूबे के डीजीपी को दुष्कर्म रूटीन घटना लग रही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि कानून कितना भी सख्त बन जाए, इसका पालन कैसे होगा। बनर्जी ने इस साल की शुरुआत से ही सूबे की पुलिस की कमान संभाली है। उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद चुनाव आ गया और करीब पांच माह का कार्यकाल चुनावी माहौल में बीत गया, पर चुनाव के बाद से सूबे में जिस तरह चौतरफा दुष्कर्म और हत्याओं की घटनाएं शुरू हुईं, उससे प्रदेश में दहशत का माहौल बन गया। इन पर अंकुश के बजाए पुलिस अपना दामन बचाने और येन-केन प्रकारेण घटनाओं का राजफाश करने में जुट गई।

बदायूं कांड में भी डीजीपी ने ऐसा ही बयान दिया जिससे पूरी कहानी उलझ गई। हो सकता है कि घटना में कुछ पेंच हो, लेकिन बिना जांच के ही डीजीपी ने आनर किलिंग, संपत्ति विवाद और आरोपियों को ही क्लीन चिट देने का माहौल बना दिया। बेहतर होता कि वह जांच का इंतजार करते या सीबीआइ जांच पूरी होने का इंतजार करते। डीजीपी के इस बयान के बाद पुलिस कोई नया तथ्य भले न पेश कर सकी, लेकिन अगले ही दिन से दुष्कर्म की घटनाओं में और तेजी आ गई। अब सवाल डीजीपी की काबिलियत पर ही है। सच तो यह भी है कि मातहतों पर उनका नियंत्रण नहीं है और वह जो भी दिशा निर्देश देते हैं, वह नीचे तक असर नहीं करता है। बानगी के तौर पर बनर्जी ने सभी एसएसपी को रात में 12 बजे से दो बजे तक गश्त के निर्देश दिए और जब वह अपने प्रभाव का आकलन करने निकले तो उन्हें निराशा मिली। मातहतों ने उनके फरमान की अनसुनी कर दी।

मुख्यमंत्री को भी डीजीपी की इस सच्चाई का भान हो गया है। इसीलिए कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में मुख्यमंत्री ने उनसे दो टूक पूछा कि बदायूं की घटना की सूचना कब मिली। इतना संवेदनशील मुददे पर भी मातहत डीजीपी को सूचनाएं मुहैया नहीं कराते। यह भी कितनी बड़ी विसंगति है कि बदायूं में पीड़ित परिवार जो कह रहा है, पुलिस उसे सुन नहीं रही है। दादरी की चेयरमैन गीता पंडित अपने पति की हत्या के लिए जिसे जिम्मेदार ठहरा रही हैं, उसे पुलिस क्लीन चिट दे रही है। इससे तो यही लगता है कि पुलिस ही अपराधियों को बचा रही है।

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नई दिल्ली. यहां पुलिस की गिरफ्त में आए 38 साल के एक टेलर ने चौंकाने वाला गुनाह कबूल किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने 12 साल में करीब 500 बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया है और करीब 2500 नाबालिगों से रेप की कोशिश की है। आरोपी सुनील रस्तोगी पांच बच्चों का पिता है। उसे 2 बच्चियों से रेप की कोशिश करने के मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया गया है। 6 महीने की सजा काट चुका… – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि सुनील ज्यादातर 8 से 10 साल की स्कूल आती-जाती बच्चियों को निशाना बनाता था। – वह उनसे कहता था कि तुम्हारे पापा तुम्हें बुला रहे हैं, कुछ सामान देना है। इस तरह नाबालिग बच्चियां उसके झांसे में आ जाती थीं। – वह मौका पाकर किसी सुनसान जगह पर बच्चियों से रेप करता था। – रस्तोगी ने ज्यादातर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घटनाओं को अंजाम दिया है। – 2006 में ऐसे ही एक मामले में वह उत्तराखंड की रुद्रपुर जेल में छह महीने की सजा काट चुका है। दिल्ली में टेलर की दुकान पर करता था काम – पुलिस के मुताबिक, सुनील ने कुछ वक्त तक ईस्ट दिल्ली में एक टेलर की दुकान पर काम किया था। – पुलिस अब उससे छह मामलों में पूछताछ कर रही है। इनमें 3 केस दिल्ली के, दो रुद्रपुर और एक बिलासपुर का है। – 2004 में उसने दिल्ली के मयूर विहार में पड़ोसी की बेटी से छेड़छाड़ की थी। तब उसे और उसके परिवार को मारपीट कर वहां से भगा दिया गया था। – पुलिस ने बताया कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला है। वह अभी उत्तराखंड के रुद्रपुर में रह रहा था। – उसकी शादी हो चुकी है। उसके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी 15 साल की है। ऐसे गिरफ्तार हुआ आरोपी – सुनील ने 13 दिसंबर को स्कूल से लौट रही 10 साल की एक नाबालिक को अगवा कर उसका सेक्शुअल हैरेसमेंट किया। – बच्ची ने पहले तो घटना के बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन उसके बर्ताव में बदलाव देख पेरेंट्स ने पूछा तो उसने अापबीती बता दी। – इसके बाद बच्ची के बताए हुलिए के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। – 12 जनवरी को अशाेक विहार में 9 और 10 साल की दो बच्चियों को अगवा करने की शिकायत आई। वे भी ट्यूशन से लौट रही थीं। सुनील ने उन्हें नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बाद में वह दोनों को अंडर कंस्ट्क्शन बिल्डिंग में ले गया और उनके साथ रेप की कोशिश की। लेकिन बच्चियों के चीखने पर वहां से फरार हो गया। – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि इस घटना के बाद न्यू अशोक नगर पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए एक टास्क फोर्स टीम बनाई। बाद में सुनील को कोंडली गांव से गिरफ्तार किया गया। सीरियल रेपिस्ट को 3 साल से तलाश रही थी पुलिस – एक पुलिस अफसर ने बताया कि इस सीरियल रेपिस्ट की पुलिस को 2013 से तलाश थी। तब दिल्ली के न्यू अशोक विहार नगर पुलिस को दो नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ की शिकायत मिली थी। – दोनों मामलों में नाबालिगों ने बताया कि आरोपी लाल जैकेट और ब्लू जींस पहने था। उसने बच्चियों को नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बच्चियों ने यह भी बताया कि जब वे आरोपी से छोड़ देने की मिन्नतें कर रही थीं, तब वह हंस रहा था। – पुलिस ने इस सीरियल रेपिस्ट की तलाश में नॉर्थ इंडिया की जेलों में बंद या वहां से रिहा हुए कैदियों का डाटाबेस देखा। डोर-टू-डोर सर्च की गई। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। उसका स्केच बनाया गया। – पुलिस ने वेंडर्स, रिक्शा चालक और शॉपकीपर्स से पूछताछ की। इनका दावा था कि बताए गए हुलिए जैसा शख्स उन्होंने देखा है। – पुलिस ने 100 सस्पेक्ट्स की एक लिस्ट तैयार की। फिर एक-एक स्केच और फोटो की पड़ताल करने के बाद तीन संदिग्धों को चुना। – आखिरकार, पुलिस को कामयाबी मिली और आरोपी उसकी पकड़ में आ गया।