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दही खाने पर हुई पिटाई से आहत नाबालिग लड़की ने जहर खाकर दी जान

गोरखपुर के चौरी चौरा इलाके में एक 10 साल की लड़की ने दही खाने पर पड़ोसियों द्वारा की गई पिटाई से आहत होकर जहर खाकर जान दे दी. इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घटना के बाद ग्राम प्रधान और अन्य लोगों के दबाव में परिजनों ने मंगलवार को मृतका का अंतिम संस्कार भी कर दिया. लेकिन इसके बाद किसी तरह हिम्मत जुटाकर पीड़ित परिवार ने पुलिस से इसकी शिकायत की. जिसके बाद पुलिस ने ग्राम प्रधान राम अवध मौर्या, पडोसी सुभाष और उसके दो बेटों प्रमोद और राजकुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 342, 504, 305 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.sc

बताया जा रहा है कि शत्रुघ्न गांव निवासी रुदल मौर्या की 10 साल की बेटी प्रियंका सोमवार को घर में अकेली थी. भूख लगने पर वह पड़ोसी सुभाष के घर गई और रसोई में रखे दही को खा लिया. इस बीच सुभाष और उसके दोनों बेटों ने उसे दही खाते देख लिया. जिसके बाद तीनों ने उसे घर के सामने ही एक पेड़ से बांध कर बर्बरता से पिटाई कर दी.

लोगों के सामने इस तरह हुई पिटाई से आहत घायल प्रियंका ने घर पहुंचकर कीटनाशक पी लिया. जब परिजन घर पहुंचे तो प्रियंका अचेत लेटी थी और उसे बदन पर चोट के निशान थे. परिजन उसे तुरंत सीएचसी लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखकर गोरखपुर रेफर कर दिया लेकिन प्रियंका की रस्ते में ही मौत हो गई.

इस घटना के बाद ग्राम प्रधान ने पीड़ित परिवार पर दबाव डालकर लड़की का अंतिम संस्कार करवा दिया.

 

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नई दिल्ली. यहां पुलिस की गिरफ्त में आए 38 साल के एक टेलर ने चौंकाने वाला गुनाह कबूल किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने 12 साल में करीब 500 बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया है और करीब 2500 नाबालिगों से रेप की कोशिश की है। आरोपी सुनील रस्तोगी पांच बच्चों का पिता है। उसे 2 बच्चियों से रेप की कोशिश करने के मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया गया है। 6 महीने की सजा काट चुका… – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि सुनील ज्यादातर 8 से 10 साल की स्कूल आती-जाती बच्चियों को निशाना बनाता था। – वह उनसे कहता था कि तुम्हारे पापा तुम्हें बुला रहे हैं, कुछ सामान देना है। इस तरह नाबालिग बच्चियां उसके झांसे में आ जाती थीं। – वह मौका पाकर किसी सुनसान जगह पर बच्चियों से रेप करता था। – रस्तोगी ने ज्यादातर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घटनाओं को अंजाम दिया है। – 2006 में ऐसे ही एक मामले में वह उत्तराखंड की रुद्रपुर जेल में छह महीने की सजा काट चुका है। दिल्ली में टेलर की दुकान पर करता था काम – पुलिस के मुताबिक, सुनील ने कुछ वक्त तक ईस्ट दिल्ली में एक टेलर की दुकान पर काम किया था। – पुलिस अब उससे छह मामलों में पूछताछ कर रही है। इनमें 3 केस दिल्ली के, दो रुद्रपुर और एक बिलासपुर का है। – 2004 में उसने दिल्ली के मयूर विहार में पड़ोसी की बेटी से छेड़छाड़ की थी। तब उसे और उसके परिवार को मारपीट कर वहां से भगा दिया गया था। – पुलिस ने बताया कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला है। वह अभी उत्तराखंड के रुद्रपुर में रह रहा था। – उसकी शादी हो चुकी है। उसके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी 15 साल की है। ऐसे गिरफ्तार हुआ आरोपी – सुनील ने 13 दिसंबर को स्कूल से लौट रही 10 साल की एक नाबालिक को अगवा कर उसका सेक्शुअल हैरेसमेंट किया। – बच्ची ने पहले तो घटना के बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन उसके बर्ताव में बदलाव देख पेरेंट्स ने पूछा तो उसने अापबीती बता दी। – इसके बाद बच्ची के बताए हुलिए के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। – 12 जनवरी को अशाेक विहार में 9 और 10 साल की दो बच्चियों को अगवा करने की शिकायत आई। वे भी ट्यूशन से लौट रही थीं। सुनील ने उन्हें नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बाद में वह दोनों को अंडर कंस्ट्क्शन बिल्डिंग में ले गया और उनके साथ रेप की कोशिश की। लेकिन बच्चियों के चीखने पर वहां से फरार हो गया। – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि इस घटना के बाद न्यू अशोक नगर पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए एक टास्क फोर्स टीम बनाई। बाद में सुनील को कोंडली गांव से गिरफ्तार किया गया। सीरियल रेपिस्ट को 3 साल से तलाश रही थी पुलिस – एक पुलिस अफसर ने बताया कि इस सीरियल रेपिस्ट की पुलिस को 2013 से तलाश थी। तब दिल्ली के न्यू अशोक विहार नगर पुलिस को दो नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ की शिकायत मिली थी। – दोनों मामलों में नाबालिगों ने बताया कि आरोपी लाल जैकेट और ब्लू जींस पहने था। उसने बच्चियों को नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बच्चियों ने यह भी बताया कि जब वे आरोपी से छोड़ देने की मिन्नतें कर रही थीं, तब वह हंस रहा था। – पुलिस ने इस सीरियल रेपिस्ट की तलाश में नॉर्थ इंडिया की जेलों में बंद या वहां से रिहा हुए कैदियों का डाटाबेस देखा। डोर-टू-डोर सर्च की गई। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। उसका स्केच बनाया गया। – पुलिस ने वेंडर्स, रिक्शा चालक और शॉपकीपर्स से पूछताछ की। इनका दावा था कि बताए गए हुलिए जैसा शख्स उन्होंने देखा है। – पुलिस ने 100 सस्पेक्ट्स की एक लिस्ट तैयार की। फिर एक-एक स्केच और फोटो की पड़ताल करने के बाद तीन संदिग्धों को चुना। – आखिरकार, पुलिस को कामयाबी मिली और आरोपी उसकी पकड़ में आ गया।