दूसरी तरफ, प्रियंका की भूमिका लगातार बढ़ रही है. पार्टी के एक बड़े नेता के शब्दों में, ‘राहुल की निर्भरता सोनिया के बजाय प्रियंका पर बढ़ रही है. पहले जो भूमिकाएं सोनिया गांधी निभाती थीं, अब वे सभी प्रियंका निभा रही हैं.’

इसका एक उदाहरण अभी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन को अंतिम रूप देते वक्त सामने आया. सूत्र बताते हैं कि प्रियंका के सख्त रुख के कारण ही कांग्रेस के रणनीतिकार सीटों की अपनी मांग को 135 से घटाकर 100 आसपास लाने पर राजी हुए थे. जिसके बाद सपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन हो सका. कांग्रेस ने भी पहली बार इस गठबंधन का पूरा श्रेय प्रियंका को दिया. पार्टी महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘इस गठबंधन को अंतिम रूप देने में प्रियंका गांधी वॉड्रा की सबसे अहम भूमिका रही.’

इससे पहले जब यह गठबंधन न हो पाने की स्थिति बन गई थी और कहा जा रहा था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इससे नाराज हैं कि कांग्रेस का कोई बड़ा नेता उनसे बात नहीं कर रहा है, तो अहमद पटेल का ट्वीट भी काबिले गौर था. सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार पटेल ने ट्विटर पर लिखा था, ‘यह समझ गलत है कि कांग्रेस की ओर से छोटे नेता बातचीत (गठबंधन पर) कर रहे हैं. बातचीत उच्च स्तर पर हो रही है. इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, कांग्रेस के प्रभारी महासचिव (आजाद) और प्रियंका शामिल हैं.’