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मनोहर जोशी मोदी के लिए वाराणसी सीट नहीं छोड़ना चाहते

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी द्वारा गुरुवार को जारी की गई सूची में कई दिग्गजों के नाम शामिल किए गए। लेकिन इसमें सबसे बड़ा पेंच खुद पार्टी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के चुनाव लड़ने की सीट को लेकर ही फंस गया। दरअसल मोदी के लिए वाराणसी की सीट को लेकर चर्चा है, लेकिन वाराणसी सीट से भाजपा के मौजूदा सांसद मुरली मनोहर जोशी अपनी सीट को नहीं छोड़ना चाह रहे हैं।

भाजपा के लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी होने के साथ ही कुछ सवाल भी खड़े होने लगे हैं। यह तमाम सवाल मोदी और जोशी के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। दरअसल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मोदी को वाराणसी से चुनाव लड़वाने के मूड में है। लेकिन जोशी इसको लेकर नाखुश हैं। हालांकि चर्चा यह भी है कि संघ की बात को इन्कार करने की हिम्मत फिलहाल कोई नहीं कर रहा है। ऐसे में जोशी को यदि सीट छोड़नी पड़ी तो उनकी भी हालत कुछ लालकृष्ण आडवाणी की तरह हो जाएगी, जिन्हें नजरअंदाज कर मोदी को पीएम प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था। इस मुद्दे पर उनकी नाराजगी सभी ने देखी।

वाराणसी सीट को लेकर भाजपा में भी भारी मतभेद है। सुषमा स्वराज के मुताबिक मोदी का वाराणसी से चुनाव लड़ना ठीक नही होगा। इसके लिए जोशी आडवाणी से भी मिल चुके हैं। बहरहाल, पहली सूची में जिन लोगों का नाम शामिल है, उनमें भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी नागपुर से चुनाव लड़ेंगे। गोपीनाथ मुंडे बीड़ सीट से, किरीट सोमैया उत्तर-पूर्व मुंबई और दिलीप गांधी अहमदनगर सीट से चुनाव लड़ेंगे।

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नई दिल्ली. यहां पुलिस की गिरफ्त में आए 38 साल के एक टेलर ने चौंकाने वाला गुनाह कबूल किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने 12 साल में करीब 500 बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया है और करीब 2500 नाबालिगों से रेप की कोशिश की है। आरोपी सुनील रस्तोगी पांच बच्चों का पिता है। उसे 2 बच्चियों से रेप की कोशिश करने के मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया गया है। 6 महीने की सजा काट चुका… – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि सुनील ज्यादातर 8 से 10 साल की स्कूल आती-जाती बच्चियों को निशाना बनाता था। – वह उनसे कहता था कि तुम्हारे पापा तुम्हें बुला रहे हैं, कुछ सामान देना है। इस तरह नाबालिग बच्चियां उसके झांसे में आ जाती थीं। – वह मौका पाकर किसी सुनसान जगह पर बच्चियों से रेप करता था। – रस्तोगी ने ज्यादातर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घटनाओं को अंजाम दिया है। – 2006 में ऐसे ही एक मामले में वह उत्तराखंड की रुद्रपुर जेल में छह महीने की सजा काट चुका है। दिल्ली में टेलर की दुकान पर करता था काम – पुलिस के मुताबिक, सुनील ने कुछ वक्त तक ईस्ट दिल्ली में एक टेलर की दुकान पर काम किया था। – पुलिस अब उससे छह मामलों में पूछताछ कर रही है। इनमें 3 केस दिल्ली के, दो रुद्रपुर और एक बिलासपुर का है। – 2004 में उसने दिल्ली के मयूर विहार में पड़ोसी की बेटी से छेड़छाड़ की थी। तब उसे और उसके परिवार को मारपीट कर वहां से भगा दिया गया था। – पुलिस ने बताया कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला है। वह अभी उत्तराखंड के रुद्रपुर में रह रहा था। – उसकी शादी हो चुकी है। उसके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी 15 साल की है। ऐसे गिरफ्तार हुआ आरोपी – सुनील ने 13 दिसंबर को स्कूल से लौट रही 10 साल की एक नाबालिक को अगवा कर उसका सेक्शुअल हैरेसमेंट किया। – बच्ची ने पहले तो घटना के बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन उसके बर्ताव में बदलाव देख पेरेंट्स ने पूछा तो उसने अापबीती बता दी। – इसके बाद बच्ची के बताए हुलिए के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। – 12 जनवरी को अशाेक विहार में 9 और 10 साल की दो बच्चियों को अगवा करने की शिकायत आई। वे भी ट्यूशन से लौट रही थीं। सुनील ने उन्हें नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बाद में वह दोनों को अंडर कंस्ट्क्शन बिल्डिंग में ले गया और उनके साथ रेप की कोशिश की। लेकिन बच्चियों के चीखने पर वहां से फरार हो गया। – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि इस घटना के बाद न्यू अशोक नगर पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए एक टास्क फोर्स टीम बनाई। बाद में सुनील को कोंडली गांव से गिरफ्तार किया गया। सीरियल रेपिस्ट को 3 साल से तलाश रही थी पुलिस – एक पुलिस अफसर ने बताया कि इस सीरियल रेपिस्ट की पुलिस को 2013 से तलाश थी। तब दिल्ली के न्यू अशोक विहार नगर पुलिस को दो नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ की शिकायत मिली थी। – दोनों मामलों में नाबालिगों ने बताया कि आरोपी लाल जैकेट और ब्लू जींस पहने था। उसने बच्चियों को नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बच्चियों ने यह भी बताया कि जब वे आरोपी से छोड़ देने की मिन्नतें कर रही थीं, तब वह हंस रहा था। – पुलिस ने इस सीरियल रेपिस्ट की तलाश में नॉर्थ इंडिया की जेलों में बंद या वहां से रिहा हुए कैदियों का डाटाबेस देखा। डोर-टू-डोर सर्च की गई। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। उसका स्केच बनाया गया। – पुलिस ने वेंडर्स, रिक्शा चालक और शॉपकीपर्स से पूछताछ की। इनका दावा था कि बताए गए हुलिए जैसा शख्स उन्होंने देखा है। – पुलिस ने 100 सस्पेक्ट्स की एक लिस्ट तैयार की। फिर एक-एक स्केच और फोटो की पड़ताल करने के बाद तीन संदिग्धों को चुना। – आखिरकार, पुलिस को कामयाबी मिली और आरोपी उसकी पकड़ में आ गया।