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नई दिल्ली: दुर्घटना पीड़ितों के प्रति लोगों की उदासीनता एक बार फिर सामने आई है

नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली में अधिक खून बहने की वजह से एक सुरक्षा गार्ड की मौत होने के बाद दुर्घटना पीड़ितों के प्रति लोगों की उदासीनता एक बार फिर सामने आई है. घटना के बाद दिल्ली सरकार ने कहा है कि वह जल्द ही एक योजना का ऐलान करेगी जिसके तहत पीड़ितों को अस्पताल ले जाने वाले लोगों और टैक्सी और ऑटो रिक्शाचालकों को ईनाम दिया जाएगा.

दिल्ली के गृहमंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि सरकार ने योजना का प्रारूप तैयार कर लिया है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में सड़क हादसों के पीड़ितों को तुरंत सहायता सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा. प्रारूप इस महीने के अंत तक कैबिनेट के सामने रखा जाएगा और फिर उपराज्यपाल नजीब जंग के पास उनकी मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

पश्चिमी दिल्ली के सुभाष नगर इलाके में एक तेज रफ्तार डिलीवरी वैन ने 35 वर्षीय एक सुरक्षा गार्ड को टक्कर मार दी थी और कोई भी राहगीर एक घंटे तक उसकी मदद करने के लिए नहीं आया, जिस वजह से सड़क पर ही उसकी मौत हो गई, जबकि एक रिक्शा चालक मृतक का मोबाइल फोन चुरा ले गया. इस घटना के एक दिन बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.

पूरी घटना सुभाष नगर इलाके में मेराज सिनेमा के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जहां गार्ड मतीबुल को अहले सुबह एक डिलीवरी वैन ने टक्कर मारी थी.

जैन ने कहा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी उसकी मदद करने के लिए आगे नहीं आया. सरकार ने एक प्रोत्साहन योजना तैयार की है जिसके तहत टैक्सी और ऑटो चालकों सहित जो लोग सड़क हादसे के पीड़ितों को अस्पताल लेकर जाएंगे उन्हें ईनाम दिया जाएगा.’’

दुर्घटनाओं के पीड़ितों को अस्पताल ले जाने वालों को ईनाम दिया जाएगा

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नई दिल्ली. यहां पुलिस की गिरफ्त में आए 38 साल के एक टेलर ने चौंकाने वाला गुनाह कबूल किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने 12 साल में करीब 500 बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया है और करीब 2500 नाबालिगों से रेप की कोशिश की है। आरोपी सुनील रस्तोगी पांच बच्चों का पिता है। उसे 2 बच्चियों से रेप की कोशिश करने के मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया गया है। 6 महीने की सजा काट चुका… – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि सुनील ज्यादातर 8 से 10 साल की स्कूल आती-जाती बच्चियों को निशाना बनाता था। – वह उनसे कहता था कि तुम्हारे पापा तुम्हें बुला रहे हैं, कुछ सामान देना है। इस तरह नाबालिग बच्चियां उसके झांसे में आ जाती थीं। – वह मौका पाकर किसी सुनसान जगह पर बच्चियों से रेप करता था। – रस्तोगी ने ज्यादातर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घटनाओं को अंजाम दिया है। – 2006 में ऐसे ही एक मामले में वह उत्तराखंड की रुद्रपुर जेल में छह महीने की सजा काट चुका है। दिल्ली में टेलर की दुकान पर करता था काम – पुलिस के मुताबिक, सुनील ने कुछ वक्त तक ईस्ट दिल्ली में एक टेलर की दुकान पर काम किया था। – पुलिस अब उससे छह मामलों में पूछताछ कर रही है। इनमें 3 केस दिल्ली के, दो रुद्रपुर और एक बिलासपुर का है। – 2004 में उसने दिल्ली के मयूर विहार में पड़ोसी की बेटी से छेड़छाड़ की थी। तब उसे और उसके परिवार को मारपीट कर वहां से भगा दिया गया था। – पुलिस ने बताया कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला है। वह अभी उत्तराखंड के रुद्रपुर में रह रहा था। – उसकी शादी हो चुकी है। उसके दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी 15 साल की है। ऐसे गिरफ्तार हुआ आरोपी – सुनील ने 13 दिसंबर को स्कूल से लौट रही 10 साल की एक नाबालिक को अगवा कर उसका सेक्शुअल हैरेसमेंट किया। – बच्ची ने पहले तो घटना के बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन उसके बर्ताव में बदलाव देख पेरेंट्स ने पूछा तो उसने अापबीती बता दी। – इसके बाद बच्ची के बताए हुलिए के आधार पर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। – 12 जनवरी को अशाेक विहार में 9 और 10 साल की दो बच्चियों को अगवा करने की शिकायत आई। वे भी ट्यूशन से लौट रही थीं। सुनील ने उन्हें नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बाद में वह दोनों को अंडर कंस्ट्क्शन बिल्डिंग में ले गया और उनके साथ रेप की कोशिश की। लेकिन बच्चियों के चीखने पर वहां से फरार हो गया। – डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने बताया कि इस घटना के बाद न्यू अशोक नगर पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए एक टास्क फोर्स टीम बनाई। बाद में सुनील को कोंडली गांव से गिरफ्तार किया गया। सीरियल रेपिस्ट को 3 साल से तलाश रही थी पुलिस – एक पुलिस अफसर ने बताया कि इस सीरियल रेपिस्ट की पुलिस को 2013 से तलाश थी। तब दिल्ली के न्यू अशोक विहार नगर पुलिस को दो नाबालिग बच्चियों से छेड़छाड़ की शिकायत मिली थी। – दोनों मामलों में नाबालिगों ने बताया कि आरोपी लाल जैकेट और ब्लू जींस पहने था। उसने बच्चियों को नए कपड़े दिलाने का लालच दिया था। – बच्चियों ने यह भी बताया कि जब वे आरोपी से छोड़ देने की मिन्नतें कर रही थीं, तब वह हंस रहा था। – पुलिस ने इस सीरियल रेपिस्ट की तलाश में नॉर्थ इंडिया की जेलों में बंद या वहां से रिहा हुए कैदियों का डाटाबेस देखा। डोर-टू-डोर सर्च की गई। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। उसका स्केच बनाया गया। – पुलिस ने वेंडर्स, रिक्शा चालक और शॉपकीपर्स से पूछताछ की। इनका दावा था कि बताए गए हुलिए जैसा शख्स उन्होंने देखा है। – पुलिस ने 100 सस्पेक्ट्स की एक लिस्ट तैयार की। फिर एक-एक स्केच और फोटो की पड़ताल करने के बाद तीन संदिग्धों को चुना। – आखिरकार, पुलिस को कामयाबी मिली और आरोपी उसकी पकड़ में आ गया।